Friday, November 24, 2017

हमारा रिश्ता

हाँ हमारा रिश्ता बस हम दोनों तक सीमित था,
 कभी सोचा ही नहीं था कि तुम युंह मुकर जाओगे,
 मेरी जिम्मेदारियाँ तुम्हें बोझ लगने लगेगी,
तुम युंह छिटक दोगे मुझे जैसे मैं कभी इंसा थी ही नहीं
 एक सामान थी जिसे सुख सुविधा के अनुसार खर्च कर लिया
 फिर उसकी जगह कुछ नया सामान ले लिया
 और भूल गये मेरा भी कोई वजुद था,
तुमने मेरे साथ ऐसा इसलिए भी किया क्योंकि
 यह करना आसान था, मेरे साथ रहते तो लड़ना पड़ता
 वो भी आपके अपनों के साथ,
इसलिए आपने कुर्बानी दे दी,
मेरे सपनों की, मेरे विश्वास , मेरे आत्म-सम्मान की,
वो आसान था क्योंकि पता था आपको
 मैं कभी भी आपके फैसलों के बीच नहीं आऊँगी,
कभी जबरदस्ती आपकी जिंदगी में रहने की कोशिश भी नहीं करुँगी,
इसलिए आपने भी एक पल भी मेरे बारे में नहीं  सोचा..
आज धन्यवाद कहने के अलावा कुछ और बचा ही नहीं हैं
हमारे और तुम्हारे बीच..
मन का एक गुबार था गर गिला लगे तो माफ कीजिएगा..

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