ईश्वर से परिपूर्ण हूं
जीवन में ऐश्वर्या हैं
विषाद का कोई अवसाद नहीं
पिता की छत्रछाया
माता का निश्छल प्रेम
भाईयों का साथ
बस अब उड़ान बाकी है
धरती पर तो बसर कर ही रहे हैं
थोड़ा सा आसमां बाकी है।।।
जिसको रुकना होता है वो समझता है जानता है कभी कभी तुमको तुमसे ज्यादा ।। जिसको जाना होता है वो चला जाता है चाहे जितना चीख चीखकर मिन्नतें करो फ...
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