जीवन की नीरसता सदा ही याद दिलाती है
ईश्वर का प्रतिबिंब धुंधला सा जाता है
कुछ पल को समय ठहर सा जाता है
मस्तिष्क की आंधी शोर इतना मचाती है
कि चाहे चाहो जितना
फिर नींद कहां आ पाती है।।।?
जिसको रुकना होता है वो समझता है जानता है कभी कभी तुमको तुमसे ज्यादा ।। जिसको जाना होता है वो चला जाता है चाहे जितना चीख चीखकर मिन्नतें करो फ...
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