मैं उनके प्यार के पंख फैलाकर उड़ रही थी..
इतनी खुश इतनी मग्न सारा आसमॉ मेरा ही तो था..
तभी एक जोर सी हवा चली मैं लड़खड़ा के गिरी..
अब जब होश आया तो पता चला न वो प्यार मेरा था..
न वो पंख मेरे थे..
मैं सिर्फ ख्वाहिशों के पंखो पर उड़ रही थी..
इसलिए एक मामुली सी हवा मुझे आसमॉ की बुलंदी से जमीं पर ले आयी..
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