(महिला सशक्तीकरण)
एक तरफ हम महिला सशक्तीकरण की बात करते है दूसरी तरफ अपने आस-पास ही होते महिलाओं के शोषण पर हम चुप्पी साध लेते है किसी भी प्रकार का कोई विरोध नहीं करते हैं
दरअसल सच सिर्फ इतना है कि महिला सशक्तीकरण मात्र एक माध्यम है जिसका उपयोग कोई भी अपनी सुविधानुसार कर लेता है कोई भी इससे इतनी आत्मीयता से नहीं जुड़ा जितनी होनी चाहिए क्योंकि यदि ऐसी आत्मीयता होती तो आये दिन बलात्कार की घटना, भरे बाजार में किसी लड़की के साथ छेड़खानी की घटनाओं का अनुपात बढ़ता नहीं अपितु कम होता..
आप किसी भी क्षेत्र में चले जाये हर जगह महिलाओं को एक अलग दृष्टि से देखा जाता है और उनके गुणों एवं कार्यशैली को एक अलग ही पैमाने पर मापा जाता है..सच कहुँ तो कभी-कभी गुणों और कार्यशैली को देखा परखा भी नहीं जाता उन्हें उनके रूप एवं सौन्दर्य के आधार पर ही स्वीकृत/अस्वीकृत कर दिया जाता है तब लगता है आखिर महिला सशक्तीकरण है क्या?
महिला सशक्तीकरण का उद्भव क्यों हुआ?
यह एक आधारभूत सच है कि समाज महिला और पुरुष दोनों से ही बनता है और यदि इन दोनों में से कोई भी कमजोर हो तो इसका समाज पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है.. इसलिए समाज को व्यवस्थित करने के लिए महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया गया क्योंकि भारत एक पुरूष प्रधान देश है जहाँ महिलाएं घर की चारदीवारी तक ही सीमित थी..
महिला सशक्तीकरण के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है..
ताकि समाज को सशक्त किया जा सके लेकिन आज भी महिला सशक्तीकरण के लिए जिस जागरुकता का होना अनिवार्य है वह अभी भी नहीं है
अभी भी समाज में ऐसी-ऐसी घटनाएँ महिलाओं के साथ होती है जो कि सम्पूर्ण मानवता को शर्मसार करने वाली है.. जैसे 2014 में घटा निर्भया कांड
निर्भया कांड के बाद के कुछ मेरे निजी अनुभव बताती हुँ उन दिनों मैं रंगपुरी में रहती थी जो कि घटनास्थल के पास ही है.. जब उन बलात्कारियों को पकड़ा गया और उनको सजा देने की बात आयी तो उस समय घर से बाहर निकलना भी बेहद मुश्किल हो गया था वहाँ के मनचलों को यह नागवार गुजर रहा था कि उन बलात्कारियों को सजा क्यों दी जा रही है?
और इसका विरोध वो वहाँ कि लड़कियों के साथ बदसलूकी करके कर रहे थे.. ऐसी घटनाएँ महिला सशक्तिकरण की धज्जियां उड़ा देती हैं
महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक प्रकार के NGO स्थापित किये गये हैं पर क्या वो महिलाओं का शोषण रोक पाने में समर्थ है..?
अधिकतर नहीं कमी कहाँ है?
कमी है इच्छाशक्ति में.. बहुत कम संस्थाएँ हैं जो सही दिशा में कार्य कर रही है.. अब राष्ट्रीय महिला आयोग को ही ले लो.. अभी हाल में ही फिल्म अभिनेत्री कंगना रनाऊत , जो कि खुद को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर चुकी है, के साथ क्या हुआ?
वो जब महिला आयोग में जाती हैं तो उनके साथ ऐसा हो सकता है तो एक साधारण महिला को कौन सुनता होगा?
अब राजनीति में ले लो एक आरक्षित महिला सीट पर महिला सशक्तिकरण के नाम पर महिलाओं को इस्तेमाल करते है सबसे बड़ा उदाहरण बिहार की राबड़ी देवी को ले लो.. नाम की मुख्यमंत्री थी वो सरकार को चला कौन रहा था उनके पति लालु प्रसाद यादव..
इसीप्रकार किसी सरकारी कार्यालय में यदि कोई महिला किसी प्रकार की कोई शिकायत लेकर जाये तो सबसे पहले उसे ऊपर से नीचे तक देखा जाता है और कभी कभी तो यहाँ तक पूछ लिया जाता कि क्या आपके यहाँ कोई आदमी नहीं हैं?
यह महिला सश्क्तिकरण का असली सच..
भारतीय समाज जहाँ महिलाओं को पूजा जाता हैं वहाँ महिलाओं की सबसे दयनीय स्थिति है..
अभी हाल में ही बाबा राम-रहीम का मामला सामने आया है.. उससे पहले आशाराम बापू का भी मामला आया था दोनों ही धर्म के नाम पर महिलाओं का शोषण कर रहे थे और इस उत्पीड़न के असली जिम्मेदार थे वो माता-पिता जो अपनी बेटी से ज्यादा भरोसा किसी साधु सन्त पर करते है.. यह कोई एक दो घटनायें नहीं है ऐसी हजारों घटनायें हैं जो महिला सशक्तिकरण पर एक करारा तमाचा हैं...
सच कहुँ तो महिला सशक्तिकरण एक परिवार से शुरू होता है यदि आपके परिवार में महिला को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है उसके कार्यो की सराहना की जाती है कदऱ की जाती है तो वह है महिला सशक्तिकरण..
इसप्रकार सशक्तिकरण परिवार से शुरू होता है और परिवार से समाज बनता है अतः समाज का सशक्तिकरण करना है तो अपने परिवार की महिलाओं को सम्मान दो प्रोत्साहन दो ताकि एक सशक्त समाज की नींव रखी जा सके..
धन्यवाद्🙏
एक तरफ हम महिला सशक्तीकरण की बात करते है दूसरी तरफ अपने आस-पास ही होते महिलाओं के शोषण पर हम चुप्पी साध लेते है किसी भी प्रकार का कोई विरोध नहीं करते हैं
दरअसल सच सिर्फ इतना है कि महिला सशक्तीकरण मात्र एक माध्यम है जिसका उपयोग कोई भी अपनी सुविधानुसार कर लेता है कोई भी इससे इतनी आत्मीयता से नहीं जुड़ा जितनी होनी चाहिए क्योंकि यदि ऐसी आत्मीयता होती तो आये दिन बलात्कार की घटना, भरे बाजार में किसी लड़की के साथ छेड़खानी की घटनाओं का अनुपात बढ़ता नहीं अपितु कम होता..
आप किसी भी क्षेत्र में चले जाये हर जगह महिलाओं को एक अलग दृष्टि से देखा जाता है और उनके गुणों एवं कार्यशैली को एक अलग ही पैमाने पर मापा जाता है..सच कहुँ तो कभी-कभी गुणों और कार्यशैली को देखा परखा भी नहीं जाता उन्हें उनके रूप एवं सौन्दर्य के आधार पर ही स्वीकृत/अस्वीकृत कर दिया जाता है तब लगता है आखिर महिला सशक्तीकरण है क्या?
महिला सशक्तीकरण का उद्भव क्यों हुआ?
यह एक आधारभूत सच है कि समाज महिला और पुरुष दोनों से ही बनता है और यदि इन दोनों में से कोई भी कमजोर हो तो इसका समाज पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है.. इसलिए समाज को व्यवस्थित करने के लिए महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया गया क्योंकि भारत एक पुरूष प्रधान देश है जहाँ महिलाएं घर की चारदीवारी तक ही सीमित थी..
महिला सशक्तीकरण के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है..
ताकि समाज को सशक्त किया जा सके लेकिन आज भी महिला सशक्तीकरण के लिए जिस जागरुकता का होना अनिवार्य है वह अभी भी नहीं है
अभी भी समाज में ऐसी-ऐसी घटनाएँ महिलाओं के साथ होती है जो कि सम्पूर्ण मानवता को शर्मसार करने वाली है.. जैसे 2014 में घटा निर्भया कांड
निर्भया कांड के बाद के कुछ मेरे निजी अनुभव बताती हुँ उन दिनों मैं रंगपुरी में रहती थी जो कि घटनास्थल के पास ही है.. जब उन बलात्कारियों को पकड़ा गया और उनको सजा देने की बात आयी तो उस समय घर से बाहर निकलना भी बेहद मुश्किल हो गया था वहाँ के मनचलों को यह नागवार गुजर रहा था कि उन बलात्कारियों को सजा क्यों दी जा रही है?
और इसका विरोध वो वहाँ कि लड़कियों के साथ बदसलूकी करके कर रहे थे.. ऐसी घटनाएँ महिला सशक्तिकरण की धज्जियां उड़ा देती हैं
महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक प्रकार के NGO स्थापित किये गये हैं पर क्या वो महिलाओं का शोषण रोक पाने में समर्थ है..?
अधिकतर नहीं कमी कहाँ है?
कमी है इच्छाशक्ति में.. बहुत कम संस्थाएँ हैं जो सही दिशा में कार्य कर रही है.. अब राष्ट्रीय महिला आयोग को ही ले लो.. अभी हाल में ही फिल्म अभिनेत्री कंगना रनाऊत , जो कि खुद को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर चुकी है, के साथ क्या हुआ?
वो जब महिला आयोग में जाती हैं तो उनके साथ ऐसा हो सकता है तो एक साधारण महिला को कौन सुनता होगा?
अब राजनीति में ले लो एक आरक्षित महिला सीट पर महिला सशक्तिकरण के नाम पर महिलाओं को इस्तेमाल करते है सबसे बड़ा उदाहरण बिहार की राबड़ी देवी को ले लो.. नाम की मुख्यमंत्री थी वो सरकार को चला कौन रहा था उनके पति लालु प्रसाद यादव..
इसीप्रकार किसी सरकारी कार्यालय में यदि कोई महिला किसी प्रकार की कोई शिकायत लेकर जाये तो सबसे पहले उसे ऊपर से नीचे तक देखा जाता है और कभी कभी तो यहाँ तक पूछ लिया जाता कि क्या आपके यहाँ कोई आदमी नहीं हैं?
यह महिला सश्क्तिकरण का असली सच..
भारतीय समाज जहाँ महिलाओं को पूजा जाता हैं वहाँ महिलाओं की सबसे दयनीय स्थिति है..
अभी हाल में ही बाबा राम-रहीम का मामला सामने आया है.. उससे पहले आशाराम बापू का भी मामला आया था दोनों ही धर्म के नाम पर महिलाओं का शोषण कर रहे थे और इस उत्पीड़न के असली जिम्मेदार थे वो माता-पिता जो अपनी बेटी से ज्यादा भरोसा किसी साधु सन्त पर करते है.. यह कोई एक दो घटनायें नहीं है ऐसी हजारों घटनायें हैं जो महिला सशक्तिकरण पर एक करारा तमाचा हैं...
सच कहुँ तो महिला सशक्तिकरण एक परिवार से शुरू होता है यदि आपके परिवार में महिला को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है उसके कार्यो की सराहना की जाती है कदऱ की जाती है तो वह है महिला सशक्तिकरण..
इसप्रकार सशक्तिकरण परिवार से शुरू होता है और परिवार से समाज बनता है अतः समाज का सशक्तिकरण करना है तो अपने परिवार की महिलाओं को सम्मान दो प्रोत्साहन दो ताकि एक सशक्त समाज की नींव रखी जा सके..
धन्यवाद्🙏
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