मैं उनसे कभी कुछ छिपा नहीं पायी
और वो मुझे बहुत कुछ बता नहीं पाये..
पता नहीं ऐसी क्या खामी थी मुझमें
जो मैं आज तक समझ नहीं पायी
बस वो रिश्ता जो मैं खुबसूरत समझती थी
और उनके लिए एक घुटन था शायद
टुट गया नहीं तोड़ दिया उन्होनें
साँसें जकड़ ली थी मैं ने उनकी
अपनी मनमानी के बोझ से
क्षमा क्या माँगु अब तो बस
सजा ही बाकी है!!!!!!!!!!
और वो मुझे बहुत कुछ बता नहीं पाये..
पता नहीं ऐसी क्या खामी थी मुझमें
जो मैं आज तक समझ नहीं पायी
बस वो रिश्ता जो मैं खुबसूरत समझती थी
और उनके लिए एक घुटन था शायद
टुट गया नहीं तोड़ दिया उन्होनें
साँसें जकड़ ली थी मैं ने उनकी
अपनी मनमानी के बोझ से
क्षमा क्या माँगु अब तो बस
सजा ही बाकी है!!!!!!!!!!
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