अच्छा हुआ कि तूने हमें तो़ड़ कर रख दिया,
घमंड भी तो बहुत था हमें तेरे होने का..
अब खुश तो बहुत होगा तू तेरी जिन्दगी से पर अब तेरी जिन्दगी भी तो तेरी नहीं है।।।
चल जा मैं ने बख्श दिया
गुनाहें मोहब्बत तेरा
पर वो तो खुदा हैं
उसके लिए तेरी गुस्ताखी
काबिल- ए-माफी नहीं है।।।
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