सच कहूं तो वो मर जाता तो उसे मरने नहीं देती कभी मैं
जिंदा रखती हर पलछिन उसको कभी अपनी आंखों में तो कभी अपनी आंखों के पानी में।।।
पर अब क्या????
अब तो वह जिंदा है
मुझमें कहीं मुझको मारकर
अपने समस्त वजूद के साथ
अपनी खुदगर्जी के साथ।।।
सच कहूं तो उस पर खुद से ज्यादा भरोसा था मुझे
जां वार देने को जी चाहता था उस पर
पर उसने जान तो नहीं निकालीं
पर सांसों को इस कदर छलनी कर दिया है कि
जां निकलती है जब भी साँस लेती हुँ मैं।।।
सच कहूं तो जिंदा हुँ मैं
लेकिन मुझमें बस मेरी ही कमी है।।।
सच कहूं तो वो तो आजाद हो गया मुझसे
मेरे वजूद से
बड़ा आसान भी था उसकाआजाद होना मुझसे मेरे वजूद से
पर मेरी आजादी मुझसे मेरे वजूद से
कब होगी बस इतना ही इन्तजार है।।।
जिंदा रखती हर पलछिन उसको कभी अपनी आंखों में तो कभी अपनी आंखों के पानी में।।।
पर अब क्या????
अब तो वह जिंदा है
मुझमें कहीं मुझको मारकर
अपने समस्त वजूद के साथ
अपनी खुदगर्जी के साथ।।।
सच कहूं तो उस पर खुद से ज्यादा भरोसा था मुझे
जां वार देने को जी चाहता था उस पर
पर उसने जान तो नहीं निकालीं
पर सांसों को इस कदर छलनी कर दिया है कि
जां निकलती है जब भी साँस लेती हुँ मैं।।।
सच कहूं तो जिंदा हुँ मैं
लेकिन मुझमें बस मेरी ही कमी है।।।
सच कहूं तो वो तो आजाद हो गया मुझसे
मेरे वजूद से
बड़ा आसान भी था उसकाआजाद होना मुझसे मेरे वजूद से
पर मेरी आजादी मुझसे मेरे वजूद से
कब होगी बस इतना ही इन्तजार है।।।
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