वो प्राण पखेरू उड़ जायेंगे
अपने कालावधि पर
पर तू तो फिर भी रह जायेगा
इस मोहपाश के चक्कर में
नया रंग मिलेगा
रुप और नया कालावधि भी मिल जायेगा
पर समझ मिलेगी उतनी ही
जितने पर तन को छोड़ेगा
तो पाना ही है तो वह नियति पा
जो कालचक्र से छुड़ा सके
तेरे परम पिता परमेश्वर को तुझमें तुझको
मिला सके
इस जीवन की प्रक्रिया में
तुम थोड़ा सा तो आगे बढ़ो
अविष्कार क्या होता है
उसको तो तनिक जान सको
जीवन एक शयन कक्ष नहीं
यह तो विस्तृत आकाश है
पर मृत्यु कोई अंत नहीं
यह तो बस अभ्यास है
तुम आज नहीं ठहरे ,सोचा,
ना थोड़ा सा विश्राम किया
तो आना पुनः जीवन में हैं
जो तूने ना प्रयास किया
मृत्यु यदि कटु सत्य है
तो जीवन भी कोई
मिथ्या नहीं
दोनों एक दूजे के
पूरक हैं
यह तेरे मन
की व्यथा नहीं
इसलिए
ठहर
ऐ
नादां
मन
तुझे
परमेश्वर से मिलना
यह भागम भाग नहीं
यह जीवन चक्र भी नहीं बस
तुझे सृष्टि की प्रक्रियाओं से जुड़ना है।।।
#भावनाओंकीवाणी
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