Thursday, September 10, 2020

गहन_ज्ञान

 वो प्राण पखेरू उड़ जायेंगे

अपने कालावधि पर

पर तू तो फिर भी रह जायेगा

इस मोहपाश के चक्कर में

नया रंग मिलेगा

रुप और नया कालावधि भी मिल जायेगा

पर समझ मिलेगी उतनी ही 

जितने पर तन को छोड़ेगा

तो पाना ही है तो वह नियति पा

जो कालचक्र से छुड़ा सके

तेरे परम पिता परमेश्वर को तुझमें तुझको 

मिला सके

इस जीवन की प्रक्रिया में

तुम थोड़ा सा तो आगे बढ़ो

अविष्कार क्या होता है 

उसको तो तनिक जान सको

जीवन एक शयन कक्ष नहीं

यह तो विस्तृत आकाश है

पर मृत्यु कोई अंत नहीं

यह तो बस अभ्यास है

तुम आज नहीं ठहरे ,सोचा,

ना थोड़ा सा विश्राम किया

तो आना पुनः जीवन में हैं

जो तूने ना प्रयास किया

मृत्यु यदि कटु सत्य है

तो जीवन भी कोई 

मिथ्या नहीं

दोनों एक दूजे के

पूरक हैं

यह तेरे मन

की व्यथा नहीं

इसलिए

ठहर

ऐ

नादां

मन

तुझे

परमेश्वर से मिलना

यह भागम भाग नहीं

यह जीवन चक्र भी नहीं बस

तुझे सृष्टि की प्रक्रियाओं से जुड़ना है।।।


#भावनाओंकीवाणी

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