हां मुझे ज्ञात है
मुझे ठगना बहुत ही आसान है
कितने बार तो मैं
बस होंठों की मुस्कान से ठगी गयी हूँ
और असंख्य बार किसी के आंसु
या झूठा पश्चाताप
बस तुम असहाय से दिखो जरा्
देखो कैसे ठग जाऊंगीं मैं तुमसे
हां मुझे ज्ञात है
मुझे ठगना बहुत आसान है।।।
एक स्वप्न सुनहरा सा दिखाओ मुझे
या बस बाहों के हार पहनाओ मुझे
चन्द घंटे बस पलको तले सुलाओ मुझे
या बस प्रेम की धुन ही सुनाओ मुझे
फिर देखो जरा
कैसे ठगती हूँ मैं
तभी तो कहती हूँ बार बार _हरबार
हां मुझे ज्ञात है
मुझे ठगना बहुत आसान है।।।
कोई धन से ठगता है
कोई मन से ठगता है
कोई तन से ठगता है
कोई प्रेम से ठगता है
कोई दोस्ती में ठगता है
कोई रिश्ते में ठगता है
पर आघात तो सभी करते है
बस थोड़ा अन्दाज बदल जाता है
पर सत्य सिर्फ़ इतना है कि
हां मुझे ज्ञात है
मुझे ठगना बहुत आसान है।।।
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