Friday, January 3, 2025

ऐसा लगता है

ऐसा लगता है जैसे जिंदगी से थक चुकी हूँ मैं 
ख्वाहिशें ख़त्म ख़त्म सी कहीं थम सी चुकी हूँ मैं 
मेरे पास पंख भी हैं और हवा भी सही दिशा में है फिर भी 
जमी जमी सी कहीं जैसे मर चुकी हूँ मैं।।।
ऐसा लगता है जैसे......
 बात करते करते सब कुछ भूल जाती हूँ मैं 
क्या कहना था मुझे क्या कहती चली जाती हूँ मैं 
कहीं असमंजस में फसीं खुद को खोती चली जाती हूँ मैं।।।
ऐसा लगता है जैसे.....

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