कभी कभी सब कुछ बेमायने सा हो जाता है.. यह सोचना.. यह खुशियां मनाना.. यह साँस लेना.. प्रेम करना.. जागते ही ज़िंदगी की सच्चाई कचोटना शुरू कर देती है.. एक चुभन.. एक नीरसता.. तमाम जिंदगी की ख्वाहिशें.. सब कुछ एक धुन में नाचने लगती है.. मजाक उड़ाने लगती है.. कहती है देखो तुम जिंदा हो.. तुम मरी नहीं हो.. तुम जिंदा हो.. तुम मर ही नहीं सकती.. चाहकर भी तुम मर ही नहीं सकती..!!!!!!!!!!!!!!!!!!
और मैं एक चुभन एक मजबूरी एक धोखे के साथ उठ जाती हुँ.. हमेशा की तरह..
शुभ प्रभात 👏👏👏
और मैं एक चुभन एक मजबूरी एक धोखे के साथ उठ जाती हुँ.. हमेशा की तरह..
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